संतोष शाह पत्रकार

रुद्रपुर देवरिया - आधुनिक भारत की सपनीली दुनिया आज प्रचार प्रसार के जरिये पुरी दुनिया तक पहुचाई जा रही है ।सब कुछ आधुनिक और विश्वस्तरीय सा दिख रहा है बड़ी बड़ी इमारते बड़ी उम्मीदें, बढ़ता विज्ञान सुंदर ख्याबो के बीच कही ना कहीं बाल मजदूरों की दुर्दशा एक दु :स्वप्न सरीखे चुभते है सरकार की आधुनिक भारत की लगातार प्रगति किसी कोने में देखिये तो कोई न कोई बच्चा अपने बचपन को भुलाकर प्रगति की गंदगी को साफ करने में जुटा है भावी  भविष्य कबाड़ व दुकानो की साफ सफाई करने में जुटा है जो लोकतंत्र के माथे पर धब्बा है ।

विभिन्न एजंसियों द्वारा रिपोर्ट में आज भी करोड़ो बच्चे स्कूल नही जाते वो भी तमाम सुविधाओं जैसे मिड डे मील,ड्रेस, दूध, कापी किताब, अन्य सुविधाओंके बावजूद कही ना कही कमी है जो बच्चे सरकारी स्कूलों में जाने से कतराते है ।छोटे बच्चे मजदूर बन आज भी लघु उघोगों,चाय की दुकानों, होटलो, ईट भट्टटो आदि जगहों पर मिल ही जाते है ।आज भी कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिक्षा और भरपेट भोजन सपने जैसा ही है ।गरीबी, भुखमरी से बाल मजदूरी को बढ़ावा मिल रहा है ।

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